Friday, May 2, 2014

एक कहानी जो बताएगी जंगल राज का सत्य


एक बार एक रिसर्चकर्त्ता जंगलराज का अध्ययन करने हेतु अफ्रीका के जंगलों में पहुंच गया। वहीं उसकी मुलाकात लोमड़ियों के एक झुंड से हुई। अब लोमड़ी जानवरों में चतुर और जिज्ञासु मानी ही जाती है। बस भटके हुए राही को जंगल में आया देख उनमें से एक ने उसके जंगल में आने का मकसद पूछा। वह राही बोला- दरअसल में जंगलराज देखने आया हूँ।
    यह सुनते ही लोमड़ी हंसते हुए बोली- कमाल करते हो! जंगलराज से निकलकर यहां व्यवस्थित चल रहे राज में जंगलराज खोजने चले आए हो?
    आदमी आश्चर्यचकित होता हुआ बोला- यह तो शैतान साधु को सच्चाई का मार्ग बताए...वैसी बात हो गई।
    लोमड़ी बोली- यही तो तुम इन्सानों की खूबी है। खोट अपने में होती है और दोष दूसरों में खोजते हो। यहां जंगल में हर छोटे-से-छोटे व बड़े-से-बड़े जानवर को अपने जीवन की जवाबदारी स्वयं उठानी होती है। यहां तक कि जिंदा रहने हेतु भी उन्हें अपने कर्मों और बुद्धि के सहारे रहना पड़ता है। जो गलती करता है, वो भुगतता है।  यहां बड़े-से-बड़ा जानवर शार्पनेस व स्फूर्ति दिखाए बगैर शिकार नहीं कर सकता है। जबकि तुम इन्सानों के यहां अंधकार-ही-अंधकार है। जो कुछ नहीं करते और कुछ नहीं जानते; ऐसे धर्मगुरुओं के भी बड़े-बड़े आश्रम हैं। अनेकपापी बड़े-बड़े चर्चों और मंदिरों के मालिक बने बैठे हैं। नेता जो किसी काबिल नहीं, आमलोगों पर शासन कर रहे हैं। देश की सेवा के नाम पर भ्रष्टाचार कर-कर के देश का धन लूटे जा रहे हैं। जो जितना गलत कार्य करना जानता है, वह उतना बड़ा धनपति होता जा रहा है। और जिनमें वाकई गट्स व बुद्धि है, जो ईमानदार व कर्मठ हैं...वे सब स्ट्रगल कर रहे हैं। बताओ जंगलराज कहां है?
   
          ...वह व्यक्ति तो जंगल से ऐसे भागा कि पूछो ही मत!
   
          - दीप त्रिवेदी
   
  

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